इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश का बेहतर तरीक़ा

 इक्विटी फंड एक म्यूचुअल फंड है, जो मुख्य रूप से शेयरों में निवेश करता है। इक्विटी फंड को स्टॉक फंड के रूप में भी जाना जाता है। इक्विटी फंड विभिन्न बाजार पूंजीकरण की कंपनियों के शेयरों में निवेश करके उच्च रिटर्न उत्पन्न करता है। 

इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 

वे डेट फंड्स और फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न देने की श्रमता रखते हैं, कंपनी का प्रदर्शन ही निवेशकों के रिटर्न को तय करता है। इक्विटी फंड में निवेश करने का प्राथमिक लाभ यह है कि आपको निवेश करने के लिए शेयरों और क्षेत्रों को चुनने के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती है। 

 

पोर्टफोलियो विविधीकरण ( portfolio diversification ) जब आप इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते हैं तो आपको विभिन्न शेयरों में एक्सपोज़र मिलता है। म्यूचुअल फंड स्कीम में आपको छोटे रूप में निवेश करने ओर विविध पोर्टफोलियो बनाने की अनुमति मिलती है। डायरेक्ट शेयरों में निवेश की तुलना में पोर्टफोलियो विविधीकरण जोखिम को कम करने में मदद करता है| इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाएं निवेश के लिए सस्ती ओर विविध मॉडल हैं।

कर रिटर्न कम जब इक्विटी म्यूचुअल फंड में आपका निवेश 12 महीने की होल्डिंग अवधि से आगे बढ़ जाता है, एक लाख से कम में रिटर्न  कर मुक्त होता हैं यदि एक लाख से ज्यादा हो तो रिटर्न टैक्स10% की दर से लागू होता है। हालांकि, यदि यह एक वर्ष से पहले भुनाया जाता है, तो 15% की दर से शॉर्ट-टर्म पूंजीगत लाभ कर लागू होता है, जो आपकी सराहना की गई पूंजी को बहुत अधिक स्तर तक कम कर सकता है और आपका वास्तविक रिटर्न नकारात्मक हो सकता है। इसलिए, हमेशा लंबे समय तक क्षितिज (horizon) के लिए निवेश करने की सलाह दी जाती है ताकि आप न केवल उच्च चक्रवृद्धि (compond) रिटर्न अर्जित करें, बल्कि एक बार भुनाए जाने के बाद अपके सभी धन कर मुक्त हो जाएं।

पेशेवर द्वारा प्रबंधित आपको अपने फंड की रोज़ाना एनालिसिस करने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि फंड  योजनाओं का प्रबंध पेशवरो द्वारा प्रबंधित किया जाता है। जब कोई निवेशक वित्तीय बाजार के ज्ञान की कमी के कारण स्टॉक में निवेश करने में असमर्थ (unable) होता है, तो उनके लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड सबसे अच्छा विकल्प होता है। जिसकी सभी योजनाएं निधि प्रबंध पेशवरो द्वारा प्रबंधित की जाती हैं।

वित्तीय लक्ष्य-उन्मुख निधि (Financial goal-oriented funds)

यदि आपके पास लॉन्ग-टर्म  वित्तीय लक्ष्य हैं, उन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड सबसे अच्छे तरीकों में से एक है। इक्विटी म्यूचुअल फंड को लार्ज-कैप, मिड-कैप, स्मॉल-कैप इत्यादि में वर्गीकृत किया जाता है, और उसके अनुसार हर फंड रिटर्न दूसरे फंड से भिन्न होता है। जिस फंड में अधिक जोखिम जुड़ा होता है, उस फंड में उतना ही उच्च रिटर्न प्राप्त करने की संभावना होती है।

इक्विटी फंड के प्रकार

आप निवेश जनादेश (mandates) और उनके द्वारा निवेश किए गए शेयरों और क्षेत्रों के आधार पर इक्विटी फंडों को वर्गीकृत कर सकते हैं।

सेक्टर और थीम्स के आधार पर

इक्विटी फंड जो किसी विशेष क्षेत्र या विषय पर अपने निवेश को केंद्रित करते हैं,सेक्टर फंड एफएमसीजी , फार्मा, टेक्नोलॉजी जैसे विशिष्ट उद्योग में निवेश करते हैं, वो इस श्रेणी में आते हैं। थीमैटिक फंड एक विशिष्ट विषय का पालन करते हैं, जैसे कि उभरते उपभोक्ता कंपनियां या अंतर्राष्ट्रीय स्टॉक।

चूंकि सेक्टर फंड और विषयगत फंड किसी विशेष सेक्टर या थीम पर ध्यान केंद्रित करते हैं| इसके कारण उनके फंड प्रदर्शन को अधिक जोख़िम का सामना करना पड़ता है, और साथ ही बाजार के जोखिम भी हैं। हालांकि, उद्योग और विषयगत फंडों को बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में विविध किया जा सकता है।

बाजार पूंजीकरण के आधार पर

लार्ज-कैप इक्विटी फंड: लार्ज-कैप फंड बहुत ही स्थिर और विश्वसनीय निवेश करते हैं। आमतौर पर, लार्ज-कैप अच्छी तरह से स्थापित कंपनियां में निवेश करते हैं|

मिड कैप इक्विटी फंड: ये फंड मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करते हैं।

मिड-एंड-स्मॉल-कैप फंड: कई ऐसे फंड भी हैं जो मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड दोनों में निवेश करते हैं।

स्माल-कैप फंड: चूंकि छोटी कंपनियों में अस्थिरता होती है, इसलिए स्मॉल-कैप फंड में उतार-चढ़ाव भरा होता है।

मल्टी-कैप फंड: बाजार पूंजीकरण में निवेश करने वाले इक्विटी फंड, जो कि तीनों तरह के लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में होते हैं, उन्हें मल्टी-कैप फंड कहा जाता है।

निवेश शैली पर आधारित

उपरोक्त सभी फंड एक्टिव निवेश शैली का अनुसरण करते हैं, जिसमें फंड मैनेजर पोर्टफोलियो कंपोजिशन का फैसला करता है। हालांकि, कई ऐसे फंड भी हैं, जिनकी पोर्टफोलियो संरचना एक विशिष्ट सूचकांक (Specific index) की नकल करती है।

किसी विशेष इंडेक्स का पालन करने वाले इक्विटी फंड को इंडेक्स फंड कहा जाता है। ये पैसिव रूप से प्रबंधित फंड हैं जो समान कंपनियों में, समान अनुपात में निवेश करते हैं, जिसे इंडेक्स फंड का पालन करना होता है।

इक्विटी फंड की विशेषताएं

80C कर में छूट

ईएलएसएस, आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत एकमात्र कर-बचत निवेश है जो आपको इक्विटी एक्सपोजर (एनपीएस के अलावा) देता है। तीन साल की सबसे छोटी लॉक-इन अवधि और उच्च प्रतिफल क्षमता के साथ, ELSS का एक अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड है। आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार छोटी लेकिन नियमित किश्तों या एकमुश्त राशि में निवेश कर सकते हैं।

निवेश की लागत

इक्विटी शेयरों की लगातार खरीद और बिक्री अक्सर इक्विटी फंड के व्यय अनुपात को प्रभावित करती है। वर्तमान में, सेबी ने इक्विटी फंड के लिए खर्च अनुपात की ऊपरी सीमा 2.5% तय की है और इसे और कम करने की योजना बना रही है। एक कम व्यय अनुपात, निश्चित रूप से, निवेशकों के लिए उच्च रिटर्न में तब्दील होता है।

होल्डिंग पीरियड

जब आप इक्विटी फंड की इकाइयों को भुनाते(redeem) हैं, तो आप पूंजीगत लाभ कमाते हैं। निवेशकों के हाथों में पूंजीगत लाभ कर योग्य हैं।टैक्सेशन की दर इस बात पर निर्भर करती है, कि आप कितने समय तक इक्विटी फंड में निवेश करते हैं और इस अवधि को होल्डिंग पीरियड कहा जाता है।

लागत-दक्षता और विविधीकरण (Cost-efficiency & diversification)

इक्विटी फंड में निवेश करके आप मामूली रकम लगाकर कई शेयरों का एक्सपोजर प्राप्त कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि आपके पास निवेश करने के लिए 2,000 रुपये हैं, तो आप लार्ज-कैप कंपनी का एक शेयर या 2-3 मिड-कैप कंपनियों में से एक शेयर खरीद पाते हैं। हालांकि, आपके पोर्टफोलियो को एकाग्रता ओर जोखिम का सामना करना पड़ेगा। लेकिन उस राशि से आप इक्विटी फंड में निवेश करके बहुत सारे शेयरों में निवेश कर सकते हैं। यह आपको विविधता (diversify) लाने और सार्थक (meaningful) रूप से लाभान्वित की अनुमति देता है।

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